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क्यों है कांग्रेस का गठबंधन में ना होना, सपा बसपा और खुद कांग्रेस के लिये फायदेमंद

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Image Credits: Zee News

कांग्रेस उत्तर प्रदेश के सपा बसपा गठबंधन का हिस्सा नहीं बन ने जा रही है। सरसरी तौर पर देखा जाये  तो कांग्रेस का ना होना गठबंधन को कमजोर बनाता हैं। क्या यह सही है ,नहीं यह पूरा सही नहीं है।

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कांग्रेस का गठबंधन में ना होना नुकसान देह कम और फायदेमंद ज्यादा हैं। नुकसान के तौर पर देखा जाये तो मुस्लिम वोटो का बटवारा सपा बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच होगा। जिस से इसका फायदा कहीं ना कहीं बीजेपी को मिलेगा। वही फायदे के तौर पर देखा जाये तो कांग्रेस की अगड़ी जातियों पर पकड़ है। बीजेपी का भी बेस वोट अगड़ी जातिया ही मानी जाती है।इस तरह देखा जाये तो कांग्रेस बीजेपी के बेस वोट में सेंध लगाकर बीजेपी को कमजोर करेंगी। अगड़ी जातिया सपा बसपा को वोट डालने में स्वाभाविक तौर पर परहेज करती है।

मुस्लिम वोटो के पिछले रुझानों की तरफ देखा जाये तो इसमें कोई शक नहीं की मुस्लिम वोटो का प्रेम दोनों पार्टियों अर्थात सपा और कांग्रेस दो नो की तरफ रहा है। पर यह भी सच है कि मुस्लिम वोटो का आक्रोश पहले इतना नहीं रहा है जितना कि अबमोदी सरकार के खिलाफ हैं। कांग्रेस का भी यह प्रयास होगा कि वह अपना फोकस अगड़ी जातियों को अपनी तरफ करने में होंगी ताकि इसका
सीधा नुकसान बीजेपी को मिले।

कांग्रेस ,बसपा और सपा इस बार यह विशेष ध्यान रखेंगी कि 2017 के विधान सभा की तरह हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण का खेल बीजेपी ना कर पाये। इसलिए अबकी बार सपा अपने बेस वोट और पिछड़ी जातियों को ,बसपा अपने दलित जातियों को और कांग्रेस अपने अगड़ी जातियों पर पूरा फोकस करेंगी। इस बार मोदी की राह सच में मुश्किलों भरा होने वाला है खास तौर पर उत्तर प्रदेश में।


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