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भाजपा को सबक सिखाने की तैयारी में नीतीश, बिहार से मोदी का पत्ता साफ़ करेंगे

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सियासत के गलियारे में एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गयी है कि बिहार का राजनीतिक समीकरण बदलने वाला है। भाजपा का एक गुट जहां लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ खड़ा हो गया है, वही अब भाजपा के सांसद नितीश के साथ गठबंधन तोड़ने का मन बना रहे है। दूसरी तरफ, नो एंट्री का बोर्ड लगाने वाली लालू की पार्टी राजद अब नीतीश को लेकर नरम है।

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ऐसे में एक बार फिर सबकी नजर नीतीश कुमार पर है। रविवार को जहां भाजपा अपने एमएलसी सच्चिदानंद राय से नीतीश विरोधी बयान देने के लिए स्पष्टीकारण मांग रही थी, वहीं नीतीश कुमार दरभंगा में राजद नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी के घर चाय पी रहे थे।

नितीश कुमार आजकल भाजपा के कई नेताओ की नज़रो में खटक रहे है आपको बता दे की कुछ दिन पहले ही नितीश ने बिहार की  स्पेशल ब्रांच की इंटेलिजेंस विंग ने आरएसएस समेत 19 हिंदू संगठनों से जुड़े हुए लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का आदेश दिया है. यह आदेश मई में स्पेशल ब्रांच के सभी डिप्टी एसपी को जारी किया गया है, जिसमें उनसे संगठनों के पदाधिकारियों का नाम और पते की जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा गया है। यह आदेश नितीश के इशारे पर दिया गया था जिसके वजह से भाजपा के नेता दुखी थे। 

जनता दल यूनाइटेड जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा के पूर्व सदस्य पवन वर्मा के ताजा बयान से गठबंधन में रिश्तों की कड़वाहट का पता चलता है। उन्होंने बीजेपी नेताओं के बयानबाजी पर नाराजगी जताते हुए कह दिया है कि अगर बीजेपी को लगता है कि वह अकेले चुनाव लड़कर सफल हो जाएगी तो वह निर्णय ले सकती है।  उसे निर्णय करना हो तो कर ले। 

हाल ही में बिहार के बीजेपी एमएलसी सच्चिदानंद राय ने बयान देकर सियासी गलियारे में हलचल मचा दी।  उन्होंने कह दिया था कि पार्टी नेतृत्व नीतीश सरकार को दिए समर्थन पर विचार करे।  इस तरह का बयान अब तक बीजेपी के किसी नेता की तरफ से नहीं आया था। उनके बयान से बीजेपी नेतृत्व भी चिंतित हुआ। सच्चिदानंद राय के बयान को एनडीए विरोधी मानते हुए बीजेपी ने उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। 


बीजेपी और जदयू के बीच रिश्तों में खटास तब शुरू हुई थी, जब मोदी सरकार 2.0 की कैबिनेट में उचित संख्या में जदयू के नेताओ को मंत्रिपद नहीं दिया गया। जिसके बाद जदयू ने सरकार में शामिल होने से दूर रहने का फैसला लिया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयानों से भी बीजेपी नेतृत्व के प्रति नाराजगी झलकी थी। बाद में नीतीश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में भी बीजेपी के विधायकों को जगह नहीं दी गई थी। इसे बदले के रूप मे देखा गया थ। इसके बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी एक दावत के मौके की तस्वीरों के जरिए नीतीश पर निशाना साधा था।

नीतीश और सिद्दीकी की अकेले में आधे घंटे की मुलाकात को राबड़ी देवी गैर राजनीतिक करार दे रही हैं। कहती है सिद्दीकी के गांव में भी बाढ़ आयी है, इस वजह से नीतीश कुमार वहां गये थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजद को तोड़ने की कोई कोशिश नहीं हो रही है। हमारी पार्टी एकजुट है। हम के अध्यक्ष जीतन राम मांझी की माने तो राजनीति संभावनाओं का खेल है, राजनीति में कुछ भी संभव है। 

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